ग़ज़ल
सारी उम्र नही सके बसाई
जे उजड़े दिलड़ू पौंगां साई
मन मसरूर बणाणा पेाणा
जे पत्थरां ने प्रीत लगाई
अंदरेटे देयां जे रंगा रंगोई
नौरा है नौखी रीत चलाई
जां टकरे गोरे जो भलखू
तां शिबंले तक रेल पुजाई
प्रेमकथा दा सार है इतना
दिलड़ू अनणा प्रीत पराई
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शनिवार, 28 जनवरी 2012
शुक्रवार, 6 मार्च 2009
कुंवारों में नसबंदी कराने का चलन शुरू
अब भारत के कुंवारों में नसबंदी कराने का चलन शुरू हो चुका है। कुंवारों द्वारा नसबंदी कराने के मामले प्रकाश में आने के बाद अब सख्ती का फैसला हुआ है। नसबंदी अब तभी होगी जबकि पति-पत्नी साथ आएंगे या लड़के के साथ मां या पिता होंगे। पता चलने पर कुंवारों को भगा दिया जाता है, लेकिन कोई झूठ ही बोले तो कुछ नहीं हो सकता। चूंकि नसबंदी खुल जाती है, इसलिए लोग डरते नहीं। डाक्टरों के अनुसार पुरुष नसबंदी में 15 मिनट का समय लगता है, जबकि खुलवाने में 3 घंटे लगते हैं। नसबंदी खुलवाने के लिए परिवार की रजामंदी जरूरी है।
कुछ लोग नसबंदी के बदले मिलने वाले रुपये के लिए आपरेशन करा रहे हैं तो कुछ ऐसे कुंवारे भी आपरेशन कराने पहुंच रहे हैं जिन्हें अपनी महिला दोस्त के साथ शारीरिक संबंध बनाने हैं लेकिन दोस्त तैयार नहीं और पहले आपरेशन का सुबूत चाहती है। चौंक गए ना? दिल्ली के अस्पतालों में आए दिन दूसरे शहरों के लड़के भी आपरेशन कराने पहुंच रहे हैं। ऐसे ही हैं 21 साल के राहुल सामंत जो अच्छे परिवार से हैं, बड़ी कंपनी में काम करते हैं लेकिन अपनी दोस्त के कहने पर लोकनायक अस्पताल पहुंच गए नसबंदी कराने। डाक्टर ने पूछा तो लापरवाह जवाब था, बाद में खुल जाएगी।
संजय गांधी अस्पताल में पिछले ही महीने 20 वर्षीय प्रदीप कुमार ने आपरेशन करा लिया था। घर वालों को पता चला तो अस्पताल भागे और मां के कहने पर डाक्टरों को नसबंदी खोलनी पड़ी। जागरण में सुनील पाण्डेय लिखते हैं कि अस्पतालों में नसबंदी कराने आने वालों का चूंकि घरेलू रिकार्ड नहीं मांगा जाता, इसलिए कुंवारे इसका फायदा उठा लेते हैं।
कुछ लोग नसबंदी के बदले मिलने वाले रुपये के लिए आपरेशन करा रहे हैं तो कुछ ऐसे कुंवारे भी आपरेशन कराने पहुंच रहे हैं जिन्हें अपनी महिला दोस्त के साथ शारीरिक संबंध बनाने हैं लेकिन दोस्त तैयार नहीं और पहले आपरेशन का सुबूत चाहती है। चौंक गए ना? दिल्ली के अस्पतालों में आए दिन दूसरे शहरों के लड़के भी आपरेशन कराने पहुंच रहे हैं। ऐसे ही हैं 21 साल के राहुल सामंत जो अच्छे परिवार से हैं, बड़ी कंपनी में काम करते हैं लेकिन अपनी दोस्त के कहने पर लोकनायक अस्पताल पहुंच गए नसबंदी कराने। डाक्टर ने पूछा तो लापरवाह जवाब था, बाद में खुल जाएगी।
संजय गांधी अस्पताल में पिछले ही महीने 20 वर्षीय प्रदीप कुमार ने आपरेशन करा लिया था। घर वालों को पता चला तो अस्पताल भागे और मां के कहने पर डाक्टरों को नसबंदी खोलनी पड़ी। जागरण में सुनील पाण्डेय लिखते हैं कि अस्पतालों में नसबंदी कराने आने वालों का चूंकि घरेलू रिकार्ड नहीं मांगा जाता, इसलिए कुंवारे इसका फायदा उठा लेते हैं।
क्या यही पाकिस्तान है ?
कुछ दिन पहले लाहौर हमले का नया विडियो विभिन्न समाचार चैनलों पर जियो टी वी के सौजन्य से दिखाया गया जो हमले के ११ मिनट के बाद का है । सी सी टी वी कैमरे में कैद इस विडियो में स्पष्ट देखा गया कि हमले को अंजाम देने के बाद बड़े इत्मीनान से ये आतंकवादी लाहौर की गलिओं में घूमते हुए गए बिना किसी खौफ के । विडियो देखने से लग ही नही रहा था कि कोई बहुत बड़ा हादसा हुआ है इस शहर में । कन्धों पर कारतूसों से भरे बैग और हाथ में एके ४७ लिए ये आतंकवादी आराम से घूम रहे हैं और पुलिस नदारद , सब कुछ इत्मीनान , क्या इसी का नाम है पाकिस्तान ? जी हाँ इसी का नाम है पाकिस्तान ........!आईये देखते हैं कैसे ?
एल फॉर लखवी जे फॉर जरारशब्दकोष में नही है प्यारखुनी जमीन, सहमा आसमानइसी का नाम है पाकिस्तान ....!झूठ बोलो -मुकर जाओदामन अपने कुतर जाओख़ुद नही सुधरे मगरआपस में बोले सुधर जाओबी फॉर बैतुलाह के फॉर करारतालीबानी अपने हैं यारसुरक्षित नही मेहमानइसी का नाम है पाकिस्तान.........!हिंसा हीं अपना है धर्मन लज्जा नही कोई शर्मतमंचों से मिल जाती रोटीतो क्यूंकर करें कोई कर्म?एच फॉर हिंसा टी फॉर तकरारकर रहे लोग असलहों से प्यारतमाशबीन हैं हुक्मरानइसी का नाम है पाकिस्तान .....!सपनों का कर दिया खूनलिफाफे से गायब मजमूनन बचपन रहा न जवानीकैसे मनाये हनीमून?के फॉर कियानी वी फॉर वारअसमंजस में है सरकारमगर फ़िर भी है वह इत्मीनानइसी का नाम है पाकिस्तान ...!
एल फॉर लखवी जे फॉर जरारशब्दकोष में नही है प्यारखुनी जमीन, सहमा आसमानइसी का नाम है पाकिस्तान ....!झूठ बोलो -मुकर जाओदामन अपने कुतर जाओख़ुद नही सुधरे मगरआपस में बोले सुधर जाओबी फॉर बैतुलाह के फॉर करारतालीबानी अपने हैं यारसुरक्षित नही मेहमानइसी का नाम है पाकिस्तान.........!हिंसा हीं अपना है धर्मन लज्जा नही कोई शर्मतमंचों से मिल जाती रोटीतो क्यूंकर करें कोई कर्म?एच फॉर हिंसा टी फॉर तकरारकर रहे लोग असलहों से प्यारतमाशबीन हैं हुक्मरानइसी का नाम है पाकिस्तान .....!सपनों का कर दिया खूनलिफाफे से गायब मजमूनन बचपन रहा न जवानीकैसे मनाये हनीमून?के फॉर कियानी वी फॉर वारअसमंजस में है सरकारमगर फ़िर भी है वह इत्मीनानइसी का नाम है पाकिस्तान ...!
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