गीत
हम अपने हिस्से का सूरज उगाएंगे।
कुछ टूटे सपनों को नए पंख लगाएंगे।।
उठ के जमीं से हम अंबर को छू लेंगे।
जो नजर चुराते है, वो नजर झुकाएंगे।।
अपना राज दिलों पर है,नहीं सिरों पर है।
जो पीछे छूट गया, उसको साथ चलाएंगे।
हो बराबर का जब भी बंटवारा हो।
यह गाते आए हैं, यह गाते जाएंगे।।
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शनिवार, 28 जनवरी 2012
कमेंटां फेसबुक ते करदी।
कमेंटां फेसबुक ते करदी।
वाल ते रोज पोस्टां करदी
सानू भी लाईक तूं करदी
फोटो भी टैग तूं करदी
मितरां ताईं कदे कदे तां लैपटॉप ते हिलया कर।
कदी फेस टू- फेस भी मिलेया कर ।।
सवेरे गुड मार्निंगां करदी
रात नू गुड नाईट भी करदी
जद भी चैट तूं करदी
गलां मिठियां मिठिया करदी
मितरां ताईं कदे कदे तां लैपटॉप ते हिलया कर।
कदी फेस टू- फेस भी मिलेया कर ।।
बडियां रक्वेस्टां करदी।
कनफर्म किसे किसे नू करदी
अपडेट स्टेटस करदी।
रोज तूं एड फोटुआं करदी।
मितरां ताईं कदे कदे तां लैपटॉप ते हिलया कर।
कदी फेस टू- फेस भी मिलेया कर ।
वाल ते रोज पोस्टां करदी
सानू भी लाईक तूं करदी
फोटो भी टैग तूं करदी
मितरां ताईं कदे कदे तां लैपटॉप ते हिलया कर।
कदी फेस टू- फेस भी मिलेया कर ।।
सवेरे गुड मार्निंगां करदी
रात नू गुड नाईट भी करदी
जद भी चैट तूं करदी
गलां मिठियां मिठिया करदी
मितरां ताईं कदे कदे तां लैपटॉप ते हिलया कर।
कदी फेस टू- फेस भी मिलेया कर ।।
बडियां रक्वेस्टां करदी।
कनफर्म किसे किसे नू करदी
अपडेट स्टेटस करदी।
रोज तूं एड फोटुआं करदी।
मितरां ताईं कदे कदे तां लैपटॉप ते हिलया कर।
कदी फेस टू- फेस भी मिलेया कर ।
हक अगर मिलते
हक अगर मिलते नहीं जो मांग कर ।
क्यों न जाएं हम हदों को लांघ कर।।
खा चुके हो तुम जो शर्म बेच कर ।
हम भी रख देंगे शराफत टांग कर ।।
क्यों न जाएं हम हदों को लांघ कर।।
खा चुके हो तुम जो शर्म बेच कर ।
हम भी रख देंगे शराफत टांग कर ।।
ऐसा तो कई बार हुआ है
ऐसा तो कई बार हुआ है जीवन की कठिनाईयों में।
कोई अचानक आन मिला हर बार हमें तन्हाईयों में ।।
दौलत की चक्कर में तुम चाहत से बड़ी दूर हुए।
हम थोड़े से इनसान हुए गर्दिश और रुसवाईयों में ।।
कविताओं में जी लेते हैं, गीतो का रस पी लेते हैं।
हम को सकंक आ जाता है, ग़ज़लों और रूबाईयों में।
कोई अचानक आन मिला हर बार हमें तन्हाईयों में ।।
दौलत की चक्कर में तुम चाहत से बड़ी दूर हुए।
हम थोड़े से इनसान हुए गर्दिश और रुसवाईयों में ।।
कविताओं में जी लेते हैं, गीतो का रस पी लेते हैं।
हम को सकंक आ जाता है, ग़ज़लों और रूबाईयों में।
ऐसा तो कई बार हुआ है
ऐसा तो कई बार हुआ है जीवन की कठिनाईयों में।
कोई अचानक आन मिला हर बार हमें तन्हाईयों में ।।
दौलत की चक्कर में तुम चाहत से बड़ी दूर हुए।
हम थोड़े से इनसान हुए गर्दिश और रुसवाईयों में ।।
कविताओं में जी लेते हैं, गीतो का रस पी लेते हैं।
हम को सकंक आ जाता है, ग़ज़लों और रूबाईयों में।
कोई अचानक आन मिला हर बार हमें तन्हाईयों में ।।
दौलत की चक्कर में तुम चाहत से बड़ी दूर हुए।
हम थोड़े से इनसान हुए गर्दिश और रुसवाईयों में ।।
कविताओं में जी लेते हैं, गीतो का रस पी लेते हैं।
हम को सकंक आ जाता है, ग़ज़लों और रूबाईयों में।
गुरुवार, 12 जनवरी 2012
तकनीक का ज्ञान, संस्कारों की पहचान
हिमाचल प्रदेश के सभी तकनीकि संस्थानों में बनेंगे हेरीटेज क्लब
तकनीक का ज्ञान, संस्कारों की पहचान
अखिल भारतीय तकनीकि शिक्षा परिषद ने लिखा तकनीकि शिक्षा निदेशक को पत्र
हिमाचल प्रदेश के तकनीकि संस्थानों में अब तकनीक के ज्ञान के साथ स्टूडेंट्स संस्कारों की पहचान भी करेंगे। प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण को लेकर हुई अनूठी पहल के तहत ऐसे सभी संस्थानों में हेरीटेज क्लब गठित किए जाएंगे। देश भर में तकनीकि शिक्षा को संचालित करने वाली अखिल भारतीय तकनीकि शिक्षा परिषद के निर्देश के बाद प्रदेश के तकनीकि शिक्षा निदेशालय ने अपने संस्थानों में सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का खाका तैयार कर लिया है। इस कवायद के तहत देश में सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में जुटी संस्था सोसायटी फॉर परमोशन ऑफ इंडियन क्लासिक एंड कल्चर अमंगस्ट यूथ (स्पिक मैके) की सेवाएं ली जाएगी। अखिल भारतीय तकनीकि शिक्षा परिषद के कार्यकारी अधिकारी डा. एसएस मथा के निर्देश के बाद प्रदेश का तकनीकि शिक्षा निदेशालय इस बारे में सभी सरकारी व निजी तकनीकि संस्थानों को निर्देश जारी कर रहा है। उम्मीद की जा रही है कि इस प्रयास से हुनर में दक्ष टेक्रोक्रेट्स को सामजिक जीवन की भी बेहतरीन समझ पैदा होगी।
सांस्कृतिक मूल्यों का होगा संरक्षण
हर संस्थान में हेरीअेज क्लब गठित होगा, जिसमें एक टीचर और कम से कम पांच स्टूडेंट्स शामिल होंगे। क्लब स्प्कि मैके के 7 मोड्यूल में से साल में कम से कम तीन इवेंट्स आयोजित करेगा। क्लब की हर सप्ताह बैठक होगी और देश की धरोहरों को लेकर स्टूडेंट्स अपनी प्रेजेंटेशन देंगे। हेरिटेज क्लब की ओर से चयनित किए गए स्टूडेंट्स को स्पिक मैके की ओर से आयोजित होने वाले जोनल और राष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग लेने भेजा जाएगा।
हजारों स्टूडेंट्स ले रहे तकनीकि शिक्षा
हिमाचल प्रदेश में सरकारी और निजी क्षेत्र में 30 बहु तकनीकि संस्थान, 17 इंजिनियरिंग कॉलेज, 13 बी फर्मा कॉलेज, 191 आईटीआई संस्थान हैं। इन संस्थानों में 22,185 स्टूडेंट्स तकनीकि शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त एक इंजीनियरिंग कॉलेज, एक बी फार्मेसी, 9 बहुतकनकि संसथानों और 81 आईटीआई के माध्यम से केंद्र प्रायोजित स्कीम के तहत 14,917 अतिरिक्त युवाओं को तकनीकि शिक्षा प्रदान की जा रही है। ऐसे में प्रदेश में 37102 स्टूडेंट्स तकनीकि शिक्षा हासिल कर रहे हैं।
सांस्कृतिक धरोहरों के प्रोत्साहन के दृष्टिगत तकनीकि संस्थानों के स्टूडेंट्स के अंदर सांस्कृतिक मूल्यों की पहचान के लिए परिषद की ओर से यह पहल की गई है।
डा. एसएस मंथा, कार्यकारी अधिकारी, भारतीय तकनीकि शिक्षा परिषद , दिल्ली।
भारतीय तकनीकि शिक्षा परिषद की ओर से मिले निर्देशानुसार सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के लिए हर तकनीकि संसथान को ऐसे क्लब बनाने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
विजय चंदन, निदेशक तकनीकि शिक्षा, सुंदरनगर ।
तकनीक का ज्ञान, संस्कारों की पहचान
अखिल भारतीय तकनीकि शिक्षा परिषद ने लिखा तकनीकि शिक्षा निदेशक को पत्र
हिमाचल प्रदेश के तकनीकि संस्थानों में अब तकनीक के ज्ञान के साथ स्टूडेंट्स संस्कारों की पहचान भी करेंगे। प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण को लेकर हुई अनूठी पहल के तहत ऐसे सभी संस्थानों में हेरीटेज क्लब गठित किए जाएंगे। देश भर में तकनीकि शिक्षा को संचालित करने वाली अखिल भारतीय तकनीकि शिक्षा परिषद के निर्देश के बाद प्रदेश के तकनीकि शिक्षा निदेशालय ने अपने संस्थानों में सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का खाका तैयार कर लिया है। इस कवायद के तहत देश में सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में जुटी संस्था सोसायटी फॉर परमोशन ऑफ इंडियन क्लासिक एंड कल्चर अमंगस्ट यूथ (स्पिक मैके) की सेवाएं ली जाएगी। अखिल भारतीय तकनीकि शिक्षा परिषद के कार्यकारी अधिकारी डा. एसएस मथा के निर्देश के बाद प्रदेश का तकनीकि शिक्षा निदेशालय इस बारे में सभी सरकारी व निजी तकनीकि संस्थानों को निर्देश जारी कर रहा है। उम्मीद की जा रही है कि इस प्रयास से हुनर में दक्ष टेक्रोक्रेट्स को सामजिक जीवन की भी बेहतरीन समझ पैदा होगी।
सांस्कृतिक मूल्यों का होगा संरक्षण
हर संस्थान में हेरीअेज क्लब गठित होगा, जिसमें एक टीचर और कम से कम पांच स्टूडेंट्स शामिल होंगे। क्लब स्प्कि मैके के 7 मोड्यूल में से साल में कम से कम तीन इवेंट्स आयोजित करेगा। क्लब की हर सप्ताह बैठक होगी और देश की धरोहरों को लेकर स्टूडेंट्स अपनी प्रेजेंटेशन देंगे। हेरिटेज क्लब की ओर से चयनित किए गए स्टूडेंट्स को स्पिक मैके की ओर से आयोजित होने वाले जोनल और राष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग लेने भेजा जाएगा।
हजारों स्टूडेंट्स ले रहे तकनीकि शिक्षा
हिमाचल प्रदेश में सरकारी और निजी क्षेत्र में 30 बहु तकनीकि संस्थान, 17 इंजिनियरिंग कॉलेज, 13 बी फर्मा कॉलेज, 191 आईटीआई संस्थान हैं। इन संस्थानों में 22,185 स्टूडेंट्स तकनीकि शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त एक इंजीनियरिंग कॉलेज, एक बी फार्मेसी, 9 बहुतकनकि संसथानों और 81 आईटीआई के माध्यम से केंद्र प्रायोजित स्कीम के तहत 14,917 अतिरिक्त युवाओं को तकनीकि शिक्षा प्रदान की जा रही है। ऐसे में प्रदेश में 37102 स्टूडेंट्स तकनीकि शिक्षा हासिल कर रहे हैं।
सांस्कृतिक धरोहरों के प्रोत्साहन के दृष्टिगत तकनीकि संस्थानों के स्टूडेंट्स के अंदर सांस्कृतिक मूल्यों की पहचान के लिए परिषद की ओर से यह पहल की गई है।
डा. एसएस मंथा, कार्यकारी अधिकारी, भारतीय तकनीकि शिक्षा परिषद , दिल्ली।
भारतीय तकनीकि शिक्षा परिषद की ओर से मिले निर्देशानुसार सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के लिए हर तकनीकि संसथान को ऐसे क्लब बनाने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
विजय चंदन, निदेशक तकनीकि शिक्षा, सुंदरनगर ।
सोमवार, 11 अप्रैल 2011
उस पीपल की छांव के लिए


उस पीपल की छांव के लिए
पीपल हमारी जिंदगी में देवता की तरह शामिल है। देवभूमि कहे जाने वाले प्रदेश में देव वृक्ष की अकाल मौत पर सरकार मौन है ओर जनता मुखर। पीपलों को बचाने की मुहिम में भास्कर प्रदेश केू लोगों के साथ है। आखिर जिंद है प्रदेश की धरोहरों को बचाने की। 11 अप्रैल 2011 को दैनिक भास्कर के मुख्य पेज पर प्रमुखता के साथ पीपलों की पीर को उजागर किया गया। काय्रकारी संपादक श्री कीर्ति राणा की प्रतिक्रिया बिल्कुल सटीक थी।
बुधवार, 2 मार्च 2011
ब्रीच ऑफ ट्रस्ट
रोरिक ट्रस्ट में एक करोड़ का गोलमाल
रोरिक ट्रस्ट के अध्यक्ष है मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल
कई सालों से नहीं हो पाई ट्रस्टियों की एक भी बैठक
अकादमी के लिए नहीं बन पाया अभी तक अपना भवन
बोर्ड ऑफ ट्रस्ट को नही मिली बैठक करने की फुर्सत
भारत- — रूस की सांस्कृतिक मैत्री का प्रतीक नग्गर स्थित रोरिक ट्रस्ट इन दिनों करोड़ों की गड़बडिय़ों को लेकर सुर्खियों में है। अटल बिहारी वाजपेयी ने देश के प्रधानमंत्री रहते ट्रस्ट को जो करोड़ों की रकम दी थी, ट्रस्ट के पास उस रकम का कोई हिसाब— किताब ही नहीं है। संस्कृति के संरक्षण के नाम पर ट्रस्ट के पैसे की खुर्द बुर्द का पटाक्षेप होते ही सरकार ने इसकी जांच शुरू की है। मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के जांच के आदेश के बाद और गड़बडिय़ां सामने आई हैं। ट्रस्ट के पास पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में दिए गए एक करोड़ रुपए कहां गए, इसके बारे में ट्रस्टियों के पास कोई हिसाब नहीं है। रूस के दार्शनिक निकोलस रोरिक की याद में 1923 में रोरिख कला संग्रहालय का निर्माण किया गया था। रोरिक ट्रस्ट के आजीवन सदस्य शक्ति सिंह ने आरटीआई के तहत ली गई जानकारी के आधार पर अनियमितताओं और गड़बडिय़ों को उजागर किया है। यहां स्थित कला अकादमी का संचालन भी एक अस्थायी भवन में हो रहा है। इसके लिए अब तक भवन नहीं बन पाया है। 2003 से लेकर बोर्ड ऑफ ट्रस्टी की बैठकें नहीं होने से आज इस ट्रस्ट में सारी गतिविधियां ठप्प हैं। रोरिक आर्ट गैलरी भी मात्र पेंटिंग की प्रदर्शनी तक ही सीमित रह गई है। कला अकादमी भवन के निर्माण को लेकर कहा जा रहा है कि जमीन उपलब्ध न होने के कारण इसका निर्माण नहीं हो पा रहा है। नौ साल से ट्रस्ट के संचालक कॉलेज के लिए जमीन उपलब्ध नहीं करवा पाए हैं। कुल्लू जिला के जिलाधीश एवं ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष बीएम नांटा का कहते हैं कि ट्रस्ट की गतिविधियों और इसके विस्तार के लिए सभी फैसले बोर्ड ऑफ ट्रस्ट की बैठक में लिए जाते हैं । उनका कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री ने आर्ट अकादमी के लिए जो एक करोड़ रुपए दिए थे, वह भवन के लिए जमीन उपलब्ध न होने के कारण खर्च नहीं किए जा सके हैं। अब 25 मार्च को बोर्ड ऑफ ट्रस्टी की बैठक प्रस्तावित है। इसमें ही ट्रस्ट को लेकर कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने की संभावनाएं है। शक्ति सिंह का आरोप है कि बोर्ड के ट्रस्टी की कुछ सालों से कोई बैठक नहीं हुई है। शक्ति सिंह के अनुसार वर्ष 2006 के बाद एक भी बैठक का आयोजन नहीं हुआ है । इस वर्ष में एक ही बैठक हुई है, जबकि वर्ष में बोर्ड ट्रस्ट की चार बैठकें होना अनिवार्य है। इसके अलावा रोरिक ट्रस्ट संचालकों के व्यवहार पर भी अंगुलियां उठाई गई हैं। रूस के महान दार्शनिक निकोलस रोरिक ने अपने जीवन के अंतिम 20 साल नग्गर में बिताए और उन्होंने इस दौरान तीस पुस्तकें लिखी और करीब सात हजार से अधिक पेंटिग बनाई जिसमें पूर्ण हिमालय और प्राकृतिक सौंदर्य को कैनवास पर चित्रित किया। ट्रस्ट के आजीवन सदस्य शक्ति सिंह का आरोप है कि बोर्ड के ट्रस्टी की कुछ सालों से बैठक नहीं हुई है। चालू वित्त वर्ष में एक ही बैठक हुई है, जबकि वर्ष में चार बैठकें होना अनिवार्य है। उधर, डीसी कुल्लू एवं ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष बीएम नांटा का कहना है कि पिछले वर्ष ट्रस्ट को लेकर एक बैठक हुई थी। बैठक 25 मार्च को बोर्ड ऑफ ट्रस्टी की बैठक प्रस्तावित है। उनका कहना है कि अगर ट्रस्ट में अनियमितताएं बरती गई हैं तो उसकी जांच होगी और दोषी के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।
छुपाई जा रही ट्रस्ट की संपत्ति
नग्गर स्थित रोरिक ट्रस्ट बेशक प्रदेश सरकार के नियंत्रण में हो, लेकिन प्रदेश सरकार की ओर से रूस की मदद से चलाए जा रहे इस ट्रस्ट को प्रदेश सरकार की ओर से कितनी मदद मिल रही है, इसकी जानकारी देने वाला सूचना अधिकार कानून लागू होने के पांच बाद तक कोई नहीं था। प्रदेश के मुख्यमंत्री इस ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। बावजूद इसके सूचना अधिकार कानून को लागू हुए पांच साल होने के बाद भी ट्रस्ट ने जनसूचना अधिकारी और एपिलेट अथॉरिटी तैनात नहीं किया । सूचना अधिकार कानून के तहत सरकारी मदद से संचालित होने वाले ट्रस्ट को भी अपना जनसूचना अधिकारी तैनात करना अनिवार्य बनाया गया है ,लेकिन इंटरनेशनल रोरिक ट्रस्ट प्रबंधन ने सरेआम केंद्र सरकार के इस कानून की धज्जियां उड़ाई । इस बात की पोल उस वक्त खुली जब ट्रस्ट के बारे में सूचना अधिकार कानून के तहत हिमाचल प्रदेश आरटीआई ब्यूरो के प्रदेश संयोजक लवण ठाकुर ने जानकारी मांगी । इस पर हरकत में आते ही डीसी कुल्लू बीएम नांटा ने प्रदेश भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग की प्रधान सचिव मनीषा नंदा को पिछले साल 24 नवंबर को पत्र लिख कर आरटीआई एक्ट की धारा 5 के तहत ट्रस्ट के जनसूचना अधिकारी व एपिलेट अथॉरिटी नियुक्त करने की अधिसूचना जारी करने का अनुरोध किया है। डीसी कुल्लू की ओर से इंटरनेशनल रोरिक ट्रस्ट के प्रबंधक को जनसूचना अधिकारी व ट्रस्ट के प्रशासक एवं एडीएम कुल्लू को एपिलेट अथॉरिटी नियुक्त करने का प्रस्ताव प्रधान सचिव को भेजा ।
नगगर में दो दशक रहे रोरिक
प्रोफेसर निकोलस रोरिख (जन्म 9 अक्टूबर 1874 - मृत्यु 13 दिसंबर 1947) रूसी दार्शिनक, लेखक, एवं पेंटर थे। वे रोरिख समझौते के जनक हैं। यह समझौता सभ्यताओं की रक्षा को कानूनी जामा पहनाता है और मुख्य रूप से बताता है कि संस्कृति की सुरक्षा सैन्य आवश्यकता से अधिक महत्वपूर्ण है। रौरिख ने अपने जीवन के अंतिम लगभग 21 साल भारत में हिमाचल प्रदेश के नग्गर के कस्बे, नग्गर में बिताए। यहीं रोरिक मेमोरियल ट्रस्ट बनाया गया है और इनके घर को संग्रहालय में बदल दिया गया है। इसी तरह का एक अन्य संग्रहालय दार्जिलिंग और बैंगलोर में भी है। रोरिख का घर बहुत सुन्दर जगह पर है। यहां से ब्यास नदी का बहुत सुन्दर दूश्य दिखायी पड़ता है। वहां जाकर लगा क्यों न यहीं बैठ कर कुछ रचनात्मक कार्य किया जाये। रोरिख के दो पुत्र थे। उनके छोटे पुत्र की शादी एक प्रसिद्घ फिल्मकारा देवका रानी से हुई थी।
रोरिक ट्रस्ट के अध्यक्ष है मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल
कई सालों से नहीं हो पाई ट्रस्टियों की एक भी बैठक
अकादमी के लिए नहीं बन पाया अभी तक अपना भवन
बोर्ड ऑफ ट्रस्ट को नही मिली बैठक करने की फुर्सत
भारत- — रूस की सांस्कृतिक मैत्री का प्रतीक नग्गर स्थित रोरिक ट्रस्ट इन दिनों करोड़ों की गड़बडिय़ों को लेकर सुर्खियों में है। अटल बिहारी वाजपेयी ने देश के प्रधानमंत्री रहते ट्रस्ट को जो करोड़ों की रकम दी थी, ट्रस्ट के पास उस रकम का कोई हिसाब— किताब ही नहीं है। संस्कृति के संरक्षण के नाम पर ट्रस्ट के पैसे की खुर्द बुर्द का पटाक्षेप होते ही सरकार ने इसकी जांच शुरू की है। मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के जांच के आदेश के बाद और गड़बडिय़ां सामने आई हैं। ट्रस्ट के पास पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में दिए गए एक करोड़ रुपए कहां गए, इसके बारे में ट्रस्टियों के पास कोई हिसाब नहीं है। रूस के दार्शनिक निकोलस रोरिक की याद में 1923 में रोरिख कला संग्रहालय का निर्माण किया गया था। रोरिक ट्रस्ट के आजीवन सदस्य शक्ति सिंह ने आरटीआई के तहत ली गई जानकारी के आधार पर अनियमितताओं और गड़बडिय़ों को उजागर किया है। यहां स्थित कला अकादमी का संचालन भी एक अस्थायी भवन में हो रहा है। इसके लिए अब तक भवन नहीं बन पाया है। 2003 से लेकर बोर्ड ऑफ ट्रस्टी की बैठकें नहीं होने से आज इस ट्रस्ट में सारी गतिविधियां ठप्प हैं। रोरिक आर्ट गैलरी भी मात्र पेंटिंग की प्रदर्शनी तक ही सीमित रह गई है। कला अकादमी भवन के निर्माण को लेकर कहा जा रहा है कि जमीन उपलब्ध न होने के कारण इसका निर्माण नहीं हो पा रहा है। नौ साल से ट्रस्ट के संचालक कॉलेज के लिए जमीन उपलब्ध नहीं करवा पाए हैं। कुल्लू जिला के जिलाधीश एवं ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष बीएम नांटा का कहते हैं कि ट्रस्ट की गतिविधियों और इसके विस्तार के लिए सभी फैसले बोर्ड ऑफ ट्रस्ट की बैठक में लिए जाते हैं । उनका कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री ने आर्ट अकादमी के लिए जो एक करोड़ रुपए दिए थे, वह भवन के लिए जमीन उपलब्ध न होने के कारण खर्च नहीं किए जा सके हैं। अब 25 मार्च को बोर्ड ऑफ ट्रस्टी की बैठक प्रस्तावित है। इसमें ही ट्रस्ट को लेकर कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने की संभावनाएं है। शक्ति सिंह का आरोप है कि बोर्ड के ट्रस्टी की कुछ सालों से कोई बैठक नहीं हुई है। शक्ति सिंह के अनुसार वर्ष 2006 के बाद एक भी बैठक का आयोजन नहीं हुआ है । इस वर्ष में एक ही बैठक हुई है, जबकि वर्ष में बोर्ड ट्रस्ट की चार बैठकें होना अनिवार्य है। इसके अलावा रोरिक ट्रस्ट संचालकों के व्यवहार पर भी अंगुलियां उठाई गई हैं। रूस के महान दार्शनिक निकोलस रोरिक ने अपने जीवन के अंतिम 20 साल नग्गर में बिताए और उन्होंने इस दौरान तीस पुस्तकें लिखी और करीब सात हजार से अधिक पेंटिग बनाई जिसमें पूर्ण हिमालय और प्राकृतिक सौंदर्य को कैनवास पर चित्रित किया। ट्रस्ट के आजीवन सदस्य शक्ति सिंह का आरोप है कि बोर्ड के ट्रस्टी की कुछ सालों से बैठक नहीं हुई है। चालू वित्त वर्ष में एक ही बैठक हुई है, जबकि वर्ष में चार बैठकें होना अनिवार्य है। उधर, डीसी कुल्लू एवं ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष बीएम नांटा का कहना है कि पिछले वर्ष ट्रस्ट को लेकर एक बैठक हुई थी। बैठक 25 मार्च को बोर्ड ऑफ ट्रस्टी की बैठक प्रस्तावित है। उनका कहना है कि अगर ट्रस्ट में अनियमितताएं बरती गई हैं तो उसकी जांच होगी और दोषी के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।
छुपाई जा रही ट्रस्ट की संपत्ति
नग्गर स्थित रोरिक ट्रस्ट बेशक प्रदेश सरकार के नियंत्रण में हो, लेकिन प्रदेश सरकार की ओर से रूस की मदद से चलाए जा रहे इस ट्रस्ट को प्रदेश सरकार की ओर से कितनी मदद मिल रही है, इसकी जानकारी देने वाला सूचना अधिकार कानून लागू होने के पांच बाद तक कोई नहीं था। प्रदेश के मुख्यमंत्री इस ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। बावजूद इसके सूचना अधिकार कानून को लागू हुए पांच साल होने के बाद भी ट्रस्ट ने जनसूचना अधिकारी और एपिलेट अथॉरिटी तैनात नहीं किया । सूचना अधिकार कानून के तहत सरकारी मदद से संचालित होने वाले ट्रस्ट को भी अपना जनसूचना अधिकारी तैनात करना अनिवार्य बनाया गया है ,लेकिन इंटरनेशनल रोरिक ट्रस्ट प्रबंधन ने सरेआम केंद्र सरकार के इस कानून की धज्जियां उड़ाई । इस बात की पोल उस वक्त खुली जब ट्रस्ट के बारे में सूचना अधिकार कानून के तहत हिमाचल प्रदेश आरटीआई ब्यूरो के प्रदेश संयोजक लवण ठाकुर ने जानकारी मांगी । इस पर हरकत में आते ही डीसी कुल्लू बीएम नांटा ने प्रदेश भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग की प्रधान सचिव मनीषा नंदा को पिछले साल 24 नवंबर को पत्र लिख कर आरटीआई एक्ट की धारा 5 के तहत ट्रस्ट के जनसूचना अधिकारी व एपिलेट अथॉरिटी नियुक्त करने की अधिसूचना जारी करने का अनुरोध किया है। डीसी कुल्लू की ओर से इंटरनेशनल रोरिक ट्रस्ट के प्रबंधक को जनसूचना अधिकारी व ट्रस्ट के प्रशासक एवं एडीएम कुल्लू को एपिलेट अथॉरिटी नियुक्त करने का प्रस्ताव प्रधान सचिव को भेजा ।
नगगर में दो दशक रहे रोरिक
प्रोफेसर निकोलस रोरिख (जन्म 9 अक्टूबर 1874 - मृत्यु 13 दिसंबर 1947) रूसी दार्शिनक, लेखक, एवं पेंटर थे। वे रोरिख समझौते के जनक हैं। यह समझौता सभ्यताओं की रक्षा को कानूनी जामा पहनाता है और मुख्य रूप से बताता है कि संस्कृति की सुरक्षा सैन्य आवश्यकता से अधिक महत्वपूर्ण है। रौरिख ने अपने जीवन के अंतिम लगभग 21 साल भारत में हिमाचल प्रदेश के नग्गर के कस्बे, नग्गर में बिताए। यहीं रोरिक मेमोरियल ट्रस्ट बनाया गया है और इनके घर को संग्रहालय में बदल दिया गया है। इसी तरह का एक अन्य संग्रहालय दार्जिलिंग और बैंगलोर में भी है। रोरिख का घर बहुत सुन्दर जगह पर है। यहां से ब्यास नदी का बहुत सुन्दर दूश्य दिखायी पड़ता है। वहां जाकर लगा क्यों न यहीं बैठ कर कुछ रचनात्मक कार्य किया जाये। रोरिख के दो पुत्र थे। उनके छोटे पुत्र की शादी एक प्रसिद्घ फिल्मकारा देवका रानी से हुई थी।
नाथ मंदिर मे भूतों को डेरा
अंतराष्ट्रीय शिवरात्रि उत्सव के बहाने बाबा भूत नाथ की व्यथा
भूतनाथ मंदिर मे भूतों को डेरा
ऐतिहासिक मंदिर की सराय में लंबे अर्से से लगे हुए हैं पत्थरों के ढेर
मंदिर के पास स्थित मंदिर की सराये की बांयी ओर भी रखे गए पत्थर
जिस बाबा भूतनाथ के मंदिर की स्थापना के बाद मंडी शहर बसा और जिसके नाम पर मंडी नगर अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि उत्सव मनाने की तैयारियों में जुटा हुआ है, उस ऐतिहासिक भूतताथ मंदिर में ऐसा प्रतीत हो रहा है, माानो यहां सच में भूतों का ही बसेरा हो। वैसे तो मंदिरों की सराय तीर्थ यात्रियों के ठहरने के लिए होती हैंं, लेकिन भूतनाथ मंदिर की सराये सालों से पत्थर रखने के काम आ रही है। पत्थर तो सराये के बाहर और मंदिर के पिछवाड़े भी रखे देखे जा सकते हैं। ये पत्थर न केवल मंदिर की खूबसूरती को दागदार कर रहे है, बल्कि हमारी आस्था के बीच हकीकत की पोल भी खोलते हैं। मेले के आयोजन पर हर बार पचास लाख से ज्यादा खर्च होते हैं, लेकिन जिसके नाम पर खर्च होते हैं, वहां की सुध कौन ले और क्यों ले? पिछली शिवरात्रि पर भी देवताओं के साथ आने वाले शिव के भक्तों को ठहराने के लिए प्रशासन के प्रबंध छोटे पड़ गए लेकिन भूतनाथ की सराये से पत्थरों को हटाने की जहमत नहीं उठाई गई। इस बार भी इस बारे में अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेला कमेटी के अध्यक्ष एवं उपायुक्त मंडी के पास मंदिर और सराये को रहने योग्य बनाने के लिए फरियाद की गई है। डीसी डॉ. अमनदीप गर्ग कहते हैं, मामला ध्यान में है और खुद भूतनाथ मंदिर की खामियों का जायजा लेकर मंदिर उसमें तत्काल सुधार किया जाएगा।
बाबा की बस्ती में पसरा सन्नाटा
भूतनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद ही मंडी का शिवरात्रि महोत्सव शुरू होगा, और सैंकड़ों के हिसाब से देवता, हजारों के हिसाब से देवलू और बजंतरी तथा लाखों के हिसाब से शिवभक्त इस मंदिर में आकर भोले बाबा से आशीर्वाद लेंगे। पर भूुतनाथ मंदिर की सराय की हालत यह है कि शायद ही शिवभक्तों की मेहमान नवाजी कर सके। सार्वजनिक शोचालय की हालत खस्ता है। बिजली की व्यवस्था का भी कोई प्रबंध नहीं है। आलम यह है कि मंदिर के कई भागों में अंधेरा पसरा रहता है। ऐसे में जबकि अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि उत्सव के दौरान इस शहर का कोना- कोना रोशन होगा, शोभायात्राएं निकलेंगी। भूतनाथ के मंदिर में क्या अंधेरा ही पसरा रहेगा? या मंदिर मेला कमेटी की आंखें खुलेगी।
चोरों की चांदी
मंदिर में पूजा अर्चना करने वालों के सामान की चोरी यहां आम बात हो गई है। चोरी की कई शिकायतें पुलिस तक पहुंच चुकी है। जिला प्रशासन मंदिर में क्लोज सर्किट कैमरे लगाने की बात करता है, लेकिन हकीकत यह है कि मंदिर में लाईट और अरमजेंसी लाइ्रट्स तक की व्यवस्था नहीं है। जिस भूतनाथ का जश्र होने वाला है, वहां की ऐसी हालत है तो फिर यह जश्र किसके लिए? ऐसे सवाल भी मेला कमेटी से जवाब मांगते हैं।
भूतनाथ मंदिर की कमियों और खामियों के बारे में खुद मंदिर परिसर में जाकर जायजा लूंगा और तमाम खामियों को दूर किया जाएगा। मंदिर में रोशनी की पूरी व्यवस्था की जाएगी।
डॉ. अमनदीप गर्ग, अध्यक्ष अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेला कमेटी एवं डीसी मंडी।
भूतनाथ मंदिर मे भूतों को डेरा
ऐतिहासिक मंदिर की सराय में लंबे अर्से से लगे हुए हैं पत्थरों के ढेर
मंदिर के पास स्थित मंदिर की सराये की बांयी ओर भी रखे गए पत्थर
जिस बाबा भूतनाथ के मंदिर की स्थापना के बाद मंडी शहर बसा और जिसके नाम पर मंडी नगर अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि उत्सव मनाने की तैयारियों में जुटा हुआ है, उस ऐतिहासिक भूतताथ मंदिर में ऐसा प्रतीत हो रहा है, माानो यहां सच में भूतों का ही बसेरा हो। वैसे तो मंदिरों की सराय तीर्थ यात्रियों के ठहरने के लिए होती हैंं, लेकिन भूतनाथ मंदिर की सराये सालों से पत्थर रखने के काम आ रही है। पत्थर तो सराये के बाहर और मंदिर के पिछवाड़े भी रखे देखे जा सकते हैं। ये पत्थर न केवल मंदिर की खूबसूरती को दागदार कर रहे है, बल्कि हमारी आस्था के बीच हकीकत की पोल भी खोलते हैं। मेले के आयोजन पर हर बार पचास लाख से ज्यादा खर्च होते हैं, लेकिन जिसके नाम पर खर्च होते हैं, वहां की सुध कौन ले और क्यों ले? पिछली शिवरात्रि पर भी देवताओं के साथ आने वाले शिव के भक्तों को ठहराने के लिए प्रशासन के प्रबंध छोटे पड़ गए लेकिन भूतनाथ की सराये से पत्थरों को हटाने की जहमत नहीं उठाई गई। इस बार भी इस बारे में अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेला कमेटी के अध्यक्ष एवं उपायुक्त मंडी के पास मंदिर और सराये को रहने योग्य बनाने के लिए फरियाद की गई है। डीसी डॉ. अमनदीप गर्ग कहते हैं, मामला ध्यान में है और खुद भूतनाथ मंदिर की खामियों का जायजा लेकर मंदिर उसमें तत्काल सुधार किया जाएगा।
बाबा की बस्ती में पसरा सन्नाटा
भूतनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद ही मंडी का शिवरात्रि महोत्सव शुरू होगा, और सैंकड़ों के हिसाब से देवता, हजारों के हिसाब से देवलू और बजंतरी तथा लाखों के हिसाब से शिवभक्त इस मंदिर में आकर भोले बाबा से आशीर्वाद लेंगे। पर भूुतनाथ मंदिर की सराय की हालत यह है कि शायद ही शिवभक्तों की मेहमान नवाजी कर सके। सार्वजनिक शोचालय की हालत खस्ता है। बिजली की व्यवस्था का भी कोई प्रबंध नहीं है। आलम यह है कि मंदिर के कई भागों में अंधेरा पसरा रहता है। ऐसे में जबकि अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि उत्सव के दौरान इस शहर का कोना- कोना रोशन होगा, शोभायात्राएं निकलेंगी। भूतनाथ के मंदिर में क्या अंधेरा ही पसरा रहेगा? या मंदिर मेला कमेटी की आंखें खुलेगी।
चोरों की चांदी
मंदिर में पूजा अर्चना करने वालों के सामान की चोरी यहां आम बात हो गई है। चोरी की कई शिकायतें पुलिस तक पहुंच चुकी है। जिला प्रशासन मंदिर में क्लोज सर्किट कैमरे लगाने की बात करता है, लेकिन हकीकत यह है कि मंदिर में लाईट और अरमजेंसी लाइ्रट्स तक की व्यवस्था नहीं है। जिस भूतनाथ का जश्र होने वाला है, वहां की ऐसी हालत है तो फिर यह जश्र किसके लिए? ऐसे सवाल भी मेला कमेटी से जवाब मांगते हैं।
भूतनाथ मंदिर की कमियों और खामियों के बारे में खुद मंदिर परिसर में जाकर जायजा लूंगा और तमाम खामियों को दूर किया जाएगा। मंदिर में रोशनी की पूरी व्यवस्था की जाएगी।
डॉ. अमनदीप गर्ग, अध्यक्ष अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेला कमेटी एवं डीसी मंडी।
शुक्रवार, 7 मई 2010
हर घर के आगे आँगन होता था
हर घर के आगे आँगन होता था
हर गाँव में पनघट होता था ।
पनघट पे पीपल होता था ।।
सुना है कि हर घर के आगे ।
खुला सा आँगन होता था ।।
वो झूम के सावन आता था।
मदमस्त सा योवन होता था। ।
नाजुक थे फूलों से रिश्ते ।
हर रिश्ता पावन होता था ।।
सोमवार, 19 अप्रैल 2010
धरोहरों को बचाने का शंखनाद
धरोहरों को बचाने का शंखनाद
धरोहर संरक्षण संगोष्ठी 2010 के आयोजन प्रदेश की धरोहरों के सरंक्षण एंव संवर्धन के लिए स्थानीय समाज को जागरूक करने की स्थानीय सामाज की एक पहल थी। संगोष्ठी में प्रदर्शियों, समीनार, परिचर्चा, नाटक और चित्रकला, भाषण और लोकगीत प्रतियोगिता के बहाने धरोहरों को बचाने का शंखनाद किया गया। संगोष्ठी में उपस्थित विभिन्न विभिन्न ऐतिहासिक मंदिरों के पुजारियों ने मंदिरों के संरक्षण - संवर्धन में आ रही समस्याओं को सामने रखा। संगोष्ठी के दौरान प्रतिभागियों को परमपरागत खाने परोसे गए। धरोहरों को बचाने के लिए विपाशा सदन में दो दिन हुए चिंतन मंथन में यह बात उभर कर सामने आई है कि अगर प्रदेश के अलग- अलग स्कूल धरोहरों को गोद लें तो प्रदेश की विभिन्न धरोहरों के आस्तित्व को बचाया जा सकता है। धरोहरों के संरक्षण के लिए स्कूलों को धरोहरों को गोद लेने की मांग की गई है। संगोष्ठी में यह बात भी सामने आई है कि कई निजी स्कूलों की ओर से यह मौखिक आदेश दिए गए है कि कि बच्चे स्थानीय बोली न बोलें,। संगोष्ठी में इस बात पर चिंता जाहिर की गई है अगर स्कूलों ने अपना रवैया नहीं बदला तो इस बोली का वजूद खत्म हो जाएगा। संगोष्ठी में भारतीय पुरातत्व विभाग नई दिल्ली, प्रदेश भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग और प्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित प्रदर्शनियों के बहाने प्रदेश की पुरातत्विक धरोहरों, प्राकृतिक धरोहरों और सांस्कृतिक धरोहरों को प्रदर्शित किया। निजी संग्रहकर्ताओं में मांडव्य कला मंच ने पुरातन परिधानों और वाद्य यंत्रों को प्रदर्शित किया तो सतीश सक्सेना ने माचिसों के संग्रह का आयोजन किया गया। पुरी ज्वैलर्स की ओर से पुरातन आभूषणों को प्रदर्शित किया गया। संगोष्ठी के दो दिन सतोहल नाटय संस्थान की ओर से महिला जैसी अनमोल धरोहर के संरक्षण को लेकर मातृदिवस नामक नाटक का मंचन किया गया । इस दौरान ननावां गांव से आई गुलाबी ठाकुर और उनकी टीम ने छिंज लोकगीत को मुंच पर जीवित कर दिया। सेमीनार का उदघाटन अवसर पर मुख्यतिथि मंडलीय आयुक्त अशवनी शर्मा ने कहा कि मंडी में धरोहरों के संरक्षण को लकर जागरूकता को देखते हुए मंडी में संग्रहालय बनाने की जरूरत महसूस की। उन्होंने कहा कि मंडी में संग्रहालय बनाने के लिए वह प्रदेश सरकार को प्रस्ताव भेजेंगे। कार्यक्रम में भाग लेने पहुचे उपायुक्त डा. अमनदीप गर्ग ने कहा कि संगांष्ठी में आए विभिन्न प्रतिभागियों के सुझावों और विचारों को लिपिबद्व करना चाहिए ताकि धरोहरों के संरक्षण को लेकर बनने वाली नीति निर्धारण के काम आ सके। भारतीय पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ सर्वेक्षण अधिकारी अशोक कोंडल ने बताया कि ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए केंद्र सरकार के नए कानून के अनुसार धरोहरों पर अतिक्रमण करने पर जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है। उन्होंने बताया कि भारतीय पुरातत्व विभाग प्रदेश की 40 ऐतिहासिक धरोहरों के सरंक्षण के लिए काम कर रहा है। संगोष्ठी में आयेजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में अव्वल रहे स्कूली बच्चों को भारतीय पुरातत्व विभाग और मांडव्य कला मंच की ओर से पुरस्कार प्रदान किए गए।
धरोहर संरक्षण संगोष्ठी 2010 के आयोजन प्रदेश की धरोहरों के सरंक्षण एंव संवर्धन के लिए स्थानीय समाज को जागरूक करने की स्थानीय सामाज की एक पहल थी। संगोष्ठी में प्रदर्शियों, समीनार, परिचर्चा, नाटक और चित्रकला, भाषण और लोकगीत प्रतियोगिता के बहाने धरोहरों को बचाने का शंखनाद किया गया। संगोष्ठी में उपस्थित विभिन्न विभिन्न ऐतिहासिक मंदिरों के पुजारियों ने मंदिरों के संरक्षण - संवर्धन में आ रही समस्याओं को सामने रखा। संगोष्ठी के दौरान प्रतिभागियों को परमपरागत खाने परोसे गए। धरोहरों को बचाने के लिए विपाशा सदन में दो दिन हुए चिंतन मंथन में यह बात उभर कर सामने आई है कि अगर प्रदेश के अलग- अलग स्कूल धरोहरों को गोद लें तो प्रदेश की विभिन्न धरोहरों के आस्तित्व को बचाया जा सकता है। धरोहरों के संरक्षण के लिए स्कूलों को धरोहरों को गोद लेने की मांग की गई है। संगोष्ठी में यह बात भी सामने आई है कि कई निजी स्कूलों की ओर से यह मौखिक आदेश दिए गए है कि कि बच्चे स्थानीय बोली न बोलें,। संगोष्ठी में इस बात पर चिंता जाहिर की गई है अगर स्कूलों ने अपना रवैया नहीं बदला तो इस बोली का वजूद खत्म हो जाएगा। संगोष्ठी में भारतीय पुरातत्व विभाग नई दिल्ली, प्रदेश भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग और प्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित प्रदर्शनियों के बहाने प्रदेश की पुरातत्विक धरोहरों, प्राकृतिक धरोहरों और सांस्कृतिक धरोहरों को प्रदर्शित किया। निजी संग्रहकर्ताओं में मांडव्य कला मंच ने पुरातन परिधानों और वाद्य यंत्रों को प्रदर्शित किया तो सतीश सक्सेना ने माचिसों के संग्रह का आयोजन किया गया। पुरी ज्वैलर्स की ओर से पुरातन आभूषणों को प्रदर्शित किया गया। संगोष्ठी के दो दिन सतोहल नाटय संस्थान की ओर से महिला जैसी अनमोल धरोहर के संरक्षण को लेकर मातृदिवस नामक नाटक का मंचन किया गया । इस दौरान ननावां गांव से आई गुलाबी ठाकुर और उनकी टीम ने छिंज लोकगीत को मुंच पर जीवित कर दिया। सेमीनार का उदघाटन अवसर पर मुख्यतिथि मंडलीय आयुक्त अशवनी शर्मा ने कहा कि मंडी में धरोहरों के संरक्षण को लकर जागरूकता को देखते हुए मंडी में संग्रहालय बनाने की जरूरत महसूस की। उन्होंने कहा कि मंडी में संग्रहालय बनाने के लिए वह प्रदेश सरकार को प्रस्ताव भेजेंगे। कार्यक्रम में भाग लेने पहुचे उपायुक्त डा. अमनदीप गर्ग ने कहा कि संगांष्ठी में आए विभिन्न प्रतिभागियों के सुझावों और विचारों को लिपिबद्व करना चाहिए ताकि धरोहरों के संरक्षण को लेकर बनने वाली नीति निर्धारण के काम आ सके। भारतीय पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ सर्वेक्षण अधिकारी अशोक कोंडल ने बताया कि ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए केंद्र सरकार के नए कानून के अनुसार धरोहरों पर अतिक्रमण करने पर जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है। उन्होंने बताया कि भारतीय पुरातत्व विभाग प्रदेश की 40 ऐतिहासिक धरोहरों के सरंक्षण के लिए काम कर रहा है। संगोष्ठी में आयेजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में अव्वल रहे स्कूली बच्चों को भारतीय पुरातत्व विभाग और मांडव्य कला मंच की ओर से पुरस्कार प्रदान किए गए।
मंगलवार, 26 मई 2009
संस्मरण :न्यूयार्क नहीं नगरोटा
पुष्पांजलि
दो शब्द प्रेम के लिए
उसे लोगों को पढने का हुनर आता था ।
दरबारी सरकारी संस्कृति में आम आदमी
का पिसना उसे अंदर तक आहत कर
जाता था । एक ऑफिसर के रूप में
डॉक्टर प्रेम भरद्वाज अपनी बिरादरी के
सताये आम आदमी दा दर्द बाँटते मिलते थे
तो एक शायर अपने लफ्जों को आम आदमी
की जुबान में बिना लग लपेट के कहता
दिखता है । यह वही आदमी है जिसकी
अदा का कायल अगर भरमौर है तो डलहौजी
में भी उसकी कलम का कारोबार चलता है ।
छोटी काशी उस आदमी के काम को बरीकी
से देखती है । प्रेम का कारवां कहाँ कहाँ से
गुजरते हुए कहाँ कहाँ तक जा पहुंचता है ।
इस प्रेम में न्यूयार्क की नहीं नगरोटा की
हसरत है ।नौकरी पूरी हुई, बच्चों की शादियाँ
कर दी । अब उस जगह का हक़ अदा करने
का वक़त आ गाया। नगरोटा में प्रदेश का कल्चर
सेंटर विकसित हो इसी पर रात दिन मंथन व्
चिंतन चल रहा था । शुरू आत हो चुकी थी ।
इसी बीच प्रेम की प्यास जगा कर वो शख्स ख़ुद
किसी दूसरी दुनिया में प्रेम का अलख जगाने
निकल गया । काश कोई प्रेम की प्यास को
समझे और नगरोटा में प्रेम की अगन जगाये।
आगे फ़िर कभी ..........................
दो शब्द प्रेम के लिए
उसे लोगों को पढने का हुनर आता था ।
दरबारी सरकारी संस्कृति में आम आदमी
का पिसना उसे अंदर तक आहत कर
जाता था । एक ऑफिसर के रूप में
डॉक्टर प्रेम भरद्वाज अपनी बिरादरी के
सताये आम आदमी दा दर्द बाँटते मिलते थे
तो एक शायर अपने लफ्जों को आम आदमी
की जुबान में बिना लग लपेट के कहता
दिखता है । यह वही आदमी है जिसकी
अदा का कायल अगर भरमौर है तो डलहौजी
में भी उसकी कलम का कारोबार चलता है ।
छोटी काशी उस आदमी के काम को बरीकी
से देखती है । प्रेम का कारवां कहाँ कहाँ से
गुजरते हुए कहाँ कहाँ तक जा पहुंचता है ।
इस प्रेम में न्यूयार्क की नहीं नगरोटा की
हसरत है ।नौकरी पूरी हुई, बच्चों की शादियाँ
कर दी । अब उस जगह का हक़ अदा करने
का वक़त आ गाया। नगरोटा में प्रदेश का कल्चर
सेंटर विकसित हो इसी पर रात दिन मंथन व्
चिंतन चल रहा था । शुरू आत हो चुकी थी ।
इसी बीच प्रेम की प्यास जगा कर वो शख्स ख़ुद
किसी दूसरी दुनिया में प्रेम का अलख जगाने
निकल गया । काश कोई प्रेम की प्यास को
समझे और नगरोटा में प्रेम की अगन जगाये।
आगे फ़िर कभी ..........................
शुक्रवार, 6 मार्च 2009
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