मंगलवार, 26 मई 2009

गजल

साफा

नजर ओआदा मुक्दा साफा ।

टोपिया पिचे लुक्दा साफा ।।

गरीब प्यो कूदी बिहानी ।

दरेली दरेली झुक्दा साफा ।।

बुम्बल बड़े सजाये कुद्मन ।

आदर खा तर पूछ दा साफा ।

सफेयाँ सफेयाँ फरक बटेर ।
इक लूटें , इक लुत्दा साफा ।।

पग परं बिच पोंडी आई ।

जह्लू जह्लू रुस्दा साफा ।।

हटिया भठिया गोरान गलियन ।

बस गरीबन जो मुछ्दा साफा ।।

लग जोग भी देना पांडे ।

ना इ बोलें कुस्दा साफा ।

गजल


लीडर
जित्ते बेशक हारे लीडर ।
इको दे ही सारे लीडर ।।

जिथु मौका जाह्लू मिला ।
खाई जांदे चारे लीडर ।।

भीड़ चलाना पोंदी सोगी ।
खूब लगांदे लारे लीडर ।।

जिते तां नजर नि ओंदे ।
रहंदे टारे टारे लीडर।।

अकड़ जाह्लू ओना लगें ।
करना पोंदे टारे लीडर ।।




गजल

गजल


सनका ने ही होनियाँ गला

बिच रास्तें परकाला पोना।
सफरें जे तरकाला पोना।।

नोटां वाले होना लग्गे ।
हुण आखां पर जाला पोना ।।

धुंध बरसाती पोंदी आई ।
रुत बद्लोनी पाला पोना ।।

पहलें खूब बनाये चेले ।
हुन गुरुआ ने पाला पोना ।।

ठगी ठोरी चलदी रहनी ।
जाहलू तक है गाला पोना ।।

सनका ने ही होनियाँ गला ।
जे मूमे पर ताला पोना ।।











गजल

गजल



गद्देयां बोझे डोंदे रहना

कितना की फनोंदे रहना ।
काहलू तक दबोंदे रहना ।।

घोडेयां दोडाँ जीती लेइयाँ ।
गद्देयां बोझे डोंदे रहना ।।

हकां तांइ लड़ना पोना ।
नि मिलने जे रोंदे रहना।।

टब्बर बड़ा छपर छोटा।
बूडे बड़े संगोंदे रहना ।।

नी जादा भी रोंदे रहना ।
कितना की ठगोंदे रहना।।

बाबेयां माला जप्देयाँ रहना।
चोरा खीसे तोह्न्दे रहना ।।

गजल


चिडियां जो दाणा चाहिदा

बस मुंह ही नि फुलांना चाहिदा .
कदी सिर भी झुकाना चाहिदा ।

कदी सुख दुःख भी लाना चाहिद।
कोई तां अपना बनाना चाहिदा ।।

बन ही नी कटाना चाहिदा ।
कोई बूटा भी लाना चाहिदा।।

हल्ला ही नी पाना चाहिदा ।
कदी हथ भी बंडाना चाहिदा।।


कोई रुसदा मनाना चाहिदा ।
कोई रोंदा हंसाना चाहिदा ।।

कदी दिल भी लगाना चाहिदा ।।
कदी मिटना मिटाना चाहिदा ।।

खाना भी कुछ बचाना चाहिदा।
थोडा दान पुन कमाना चाहिदा।।

नाचना भी कने नचाना चाहिदा ।
पहलें तां गाना बजाना चाहिदा।।

कोई सपना सजाना चाहिदा ।
कोई बंजर बसाना चाहिदा ।।

कुत्ते जो तां मठुनी चाहीदी
चिडिया जो भी दाणा चाहिदा ।।

रविवार, 24 मई 2009

गजल


चाचा

लगेया जीणा मरणा चाचा ।
मरणे ते क्या डरना चाचा ।।
शेर बणी के जीणा चाचा ।
भेड़ बणी नी मरणा चाचा ।।
हथ पैर भी हलाना पौने ।
रोज नी बूता सरना चाचा ।।
मरने बाद भी जिन्दा रहंदे ।
ऐसा कम कोई करना चाचा ।।
लश्कें गद्कें बेशक जिन्हा ।
पर नी लगदा बरना चाचा ।।
मश्केरा ने भारियाँ बीडाँ ।
पानिये सारें झरना चाचा ।।
आली बिच ही मारदा चुबीअं ।
कदी तां पतना तरना चाचा ।।
दफ्तर - दफ्तर बहरे टोने ।
देना पोना हुन धरना चाचा ।।
गल गठी नें बणी रखनी ।
जे करना सेह भरना चाचा ।।

शनिवार, 23 मई 2009

दुविधा में राजा, टेंशन में प्रजा


मंडी से कांग्रेस के सांसद बने राजा वीरभद्र सिंह केंद्र सरकार में मंत्री नहीं बन पाए , इस बात को लेकर हिमाचल में कांग्रेस से ग्रासरूट से जुड़े कार्यकर्ता बुरी तरह से हतोत्साहित हैं। हालाँकि हिमाचल के कोटे से केबिनेट में झंडी पाने वाले आनंद शर्मा पिछली मनमोहन सरकार में मिनिस्टर फॉर स्टेट थे और नेशनल लीडर के रूप में उनकी पहचान होती है लेकिन उनका नाता प्रदेश के वोटरों से ज्यादा दस जनपथ के साथ है। दूसरी और वीरभद्र प्रदेश में कांग्रेस के सबसे बड़े मॉस लीडर माने जाते है। मंडी की लडाई अपने बलबूते जीतने वाले वीरभद्र सिंह के बारे में पार्टी आलाकमान के कान भरने का सिलसिला लंबे अरसे से चल रहा है। अपनी ही पार्टी में उनके विरोधी दिल्ली दरबार में अपना काम करने में कामयाब रहे हैं । राज्यसभा सांसद आनंद शर्मा के मुकाबले कुर्सी की दौड़ में लोकसभा सांसद की स्टेट का सबसे सीनियर लीडर होने की योग्यता नजरअंदाज हो गई है । प्रदेश में पार्टी संगठन के साथ के बावजूद उनके दावे का खारिज होना यहाँ उनके वफादारों को अखरने लगा है। ऐसे में जहाँ वीरभद्र ने दिल्ली में चुपी साध रखी है वहीँ अपने समर्थकों को भी अभी तक जुबान बंद रखने की हिदायत दी है । दरअसल मंगलवार को होने वाले केबिनेट विस्तार से पहले वीरभद्र सिंह कोई विवाद खडा नहीं करना चाहते हैं। उन्हें उम्मीद है कि केबिनेट विस्तार में उनके दावे पर आलाकमान विचार कर सकता है दावे को मजबूत करने के लिए वीरभद्र सिंह हर सोर्स को लोबिंग कर के लिए प्रयोग कर रहे हैं ।
सरवाइवल कि लडाई लड़ रहे वीरभद्र को अगर विस्तार में उनके कद के मुताबिक पोस्ट नहीं मिलती है तो प्रदेश कांग्रेस में आर पार कि लडाई तय है । अगर एसा होता है तो हिमाचल में नुकसान कांग्रेस का ही होगा।